Monday, June 22, 2020

धारावी पुलिस द्वारा किन्नरों पर अत्याचार का सच! aur निडर होकर कोविड-१९ की जांच में लगी हुई हैं दो डॉक्टर बहनें!

धारावी पुलिस द्वारा किन्नरों पर अत्याचार का सच!

मुंबई :(जनहितन्युज) पिछले दिनों किन्नरों का एक गिरोह  धारावी पुलिस स्टेशन के सामने जमा होकर नग्न प्रदर्शन शुरु कर अश्लील हरकते करने लगा, धारावी ९० फिट रोड पर लोग  इस तमाशे को देख लोग शर्मिंदा हो रहे थे। ज्ञात हो कि शन्नो (अम्मा) नामक तृतीयपंथी का अख्तर नामक युवक के साथ लंबे अरसे से संबध था जो उसके बगल में रहता है, परंतु कुछ दिनों से शन्नो और अख्तर में अनबन हो रही थी और अंतत: उनके बीच दूरी आ गई। अख्तर के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग को लेकर किन्नरों ने धारावी पुलिस थाने के मुख्य द्वार पर  धरना दे दिया और पुलिस पर दबाव बनाने लगे कि पुलिस अख्तर को गिरफ्तार करे और कारवाई करे। अख्तर पर केस करवाने का उद्देश्य यह था कि उसे ब्लॅक मेल कर उससे मोटी रकम उगाही जाए। बतला दें कि किन्नरों द्वारा लोगों को सताने,  ब्लॅकमेलिंग करने तथा धारावी टी जंक्शन पर बान्द्रा की ओर जाने वाली सड़क के दोनो  ओर शाम के समय इनका जमावड़ा हो जाता है ओर यह किन्नर आने जाने जाने वाले राहगीरों को सताने, अश्लील हरकतें करने, और झा़डियों मे जा कर लूट लेने जैसे कृत्य करते थे जिसकी अनेंकों शिकायतें धारावी पुलिस थाने में दर्ज हुई  है। 
   घटना की शाम किन्नर धारावी पुलिस थाने के सामने जमा होकर अख्तर पर कारवाई करने की मांग करने लगे पुलिस ने उन्हे समझाने का प्रयत्न किया कि अभी लॉकडाऊन  तथा रात्री के कफ्र्यु के कारण पुलिस व्यस्त है और हम उसपर अवश्य कारवाइ करेंगे परंतु इन किन्नरों ने पुलिस की एक ना सुनी और पुलिस पर दबाव बनाने के लिये ८-१० किन्नर सड़क पर ही विवस्त्र होकर अश्लील हरकतें करने लगे और तालियां बजा बजा कर पुलिस के ऊपर आने लगे और अचानक उन लोगों ने पुलिस वालों पर पत्थर फेंके, जिससे कई पुलिस अधिकारी घायल हो गए। इसके बावजूद पुलिस द्वारा बारांबार समझाने और कपड़े पहन लेने का अनुरोध करने के बावजूद उनकी एक ही रट थी ‘जब तक आरोपी के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की जाती, हम कहीं नहीं जाएंगे,’ किन्नरों का अश्लील डांस देखने के  लिए धारावी पुलिस स्टेशन और ९० फुट की सड़क के सामने भीड़ जमा हो गई थी जो लोगों को शर्मसार कर रही थी। तत्पश्चात पुलिस द्वारा सख्त रवैया अपनाने पर सभी भाग खड़े हुए इस भगदड़ में उनकी लीडर माया सानप रोड डिवायडर पर गिर गई जिससे उसे चोट लग गई ( माया सानप का हाथ पहले से फ्रैक्चर  था) पुलिस द्वारा किन्नरों के खिलाफ की गई इस कार्रवाई ने उनकी दादागीरी को तोड़ दिया।  और उनके द्वारा भविष्य में इस तरह की दादागीरी संभव नहीं!  इस लिये वे पुलिस अधिकारियों के खिलाफ समाज में सहानुभूति हासिल करने के लिए झूठे  आरोप लगा रहे हैं क्योंकि पुलिस ने कुछ किन्नरोेंं को गिरफ्तार किया है।  लेकिन पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के कारण धारावी के सभी नागरिक पुलिस की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं। 
 उनके कुकर्मों पर कानूनी रोक लगाना जरूरी था।  
हर कोई कोरोना संकट का सामना कर रहा है।  हालांकि, कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पुलिस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।  इस बीच, कई पुलिस अधिकारी कोरोना से संक्रमित हो गए,  कोरोना मे काम के भार के कारण पुलिस कर्मी तनाव व दबाव मेंं है और उनके पास छुट्टीयां नहीं है। तनाव कम करने और उनका उत्साह बढ़ाने के लिए मुंबई पुलिस के अतिरिक्त आयुक्त वीरेश प्रभु, पुलिस उपायुक्त नियती ठाकर कर दवे धारावी पुलिस स्टेशन का बार बार दौरा कर रहे हैं।  मुंबई के पुलिस आयुक्त परमवीर सिंह ने भी पुलिस स्टेशन का दौरा किया है।  कोरोना युग के दौरान लगातार सड़कों पर काम करने वाले पुलिसकमिNयों का मनोबल बढ़ाने की बहुत जरूरत है। परंतु कुछ छुटभैय्ये पत्रकार व समाचार चैनल पुलिस के खिलाफ खबर देकर मुंबई पुलिस का मनोबल गिरा रहे हैं! पत्रकारों का स्वभाव यह होता है कि सत्य जनता के सामने लाऐं न कि झूठी और मनघड़ंत बाते जनता के सामने परोसें। जनहित विजय ऐसे पत्रकारों का निषेध करता है, हमें अपनी गरिमा बनाए रखनी चाहिए




निडर होकर कोविड-१९ की जांच में लगी हुई हैं  दो डॉक्टर बहनें!

मुंबई : जनहितन्युज: धारावी क्षेत्र में कोरोनोवायरस रोगियों की बढ़ती संख्या के डर से, जब अधिकांश निजी डॉक्टरों ने अपने क्लनिकों को बंद कर दिया, तो धारावी की दो डॉक्टर बहनें जिनका जन्म-शिक्षा-पालन पोषण धारावी में हुआ और बड़ी बहन का विवाह मुंबई भायकला तथा छोटी बहन का विवाह मुंबई के मलाड में हुआ परंतु धारावीकरों  की सेवा-सुश्रुषा के लिये धारावी को ही चुना और दोनों बहनों ने अपनी डिस्पेंसरी शुरु की। कोरोना का प्रादुर्भाव जब बढा और सरकार की ओर से पूर्ण लॉकडाऊन की घोषणा की गई। लेकिन इन बहनों ने अपना कार्य बंद नहीं किया जबकि अधिकांश डॉक्टरों ने अपने ाqक्लनिक पर ताले लगा दिए थे डॉक्टर ज़ैनब का ाqक्लनिक कभी बंद नहीं हुआ उन्होंने अपनी सेवा जारी रखी जब धारावी के डॉक्टरों ने स्थानीय लोगों की मेडिकल जांच के लिए बीएमसी को अपने नाम प्रस्तुत किए तब यह दोनों बहनें डॉक्टर फातिमा तथा डॉक्टर ज़ैनब सबसे आगे रही और इन दोनों बहनों ने बिना किसी मुआवजे के इस सेवा के लिए अपना नाम बीएमसी को सौंप दिया। जिसके कारण उनके साहस और बहादुरी की प्रशंसा की जा रही है।

       धारावी की विधायक वर्षा गायकवाड़ के प्रयासों तथा मुंबई महानगर पालिका व बीजेएस (भारत जैन असोसिएशन) के सहयोग से मोबाईल क्लिनिक  की शुरुआत की गई तब यह दोनों बहने सड़कों पर मोबाईल क्लिनिक   द्वरा कोरोना की थर्मल तापमान और स्क्रीनिंग कर रही हौ  जनहित २४ न्युज के संवाददाता से बात करते हुए भायकला में रहने वाली डॉ फातिमा अशरफ खान ने कहा कि मेरी छोटी बहन ज़ैनब खान सुफियान खान मलाड के पठानवाड़ी में रहती हैं। हम धारावी में पैदा हुए थे और वहाँ अपनी शिक्षा पूरी की, शादी से पहले मैंने धारावी की ओएनजीसी के सामने अपने क्लिनिक  की शुरुआत की। इसी तरह मेरी बहन ज़ैनब भी धारावी में ९० फुट की सड़क पर अपना क्लिनिक  चला रही हैं। हम दोनों धारावी आयुष डॉक्टर्स एसोसिएशन की सदस्य हैं। एक महीने पहले, बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग ने एसोसिएशन से संपर्क किया और कोरोनोवायरस परीक्षण के लिए कहा। जब एसोसिएशन ने डॉक्टरों को इसके बारे में बताया, तो हम दोनों ने कोरोना वायरस से लड़ने का फैसला किया। तब से लेकर आज तक, वे रोजाना सुबह के समय अपना क्लिनिक  बंद रखती हैं, सुबह से दोपहर ३ बजे तक धारावी की सड़कों पर घूमते हुए कोरोना की ाqस्क्रनिंग करती हैं, स्थानीय लोगों की जांच करती हैं और अपनी रिपोर्ट बीएमसी स्वास्थ्य विभाग को सौंप देती हैं।
एक सवाल के जवाब में, डॉ.जैनब ने कहा कि हम दोनों के पास एक आंगनवाड़ी नौकरानी के अलावा एक एम्बुलेंस और उसके ड्राइवर रहते हैं जो सड़कों और घरों में जाते हैं और लोगों को जाँच के लिए लाते हैं और हम उनकी स्क्रीनिंग करते हैं। अब तक, हमने ५,००० से अधिक लोगों का परीक्षण किया है।
    इस संबंध में डॉ.ज़ैनब खान का कहना है कि दिन में एक बार अपना ाqक्लनिंक बंद करने के बाद, हम दोनों कोरोनो वायरस रोगियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए सुबह अपनी टीम के साथ निकलते हैं। स्थानीय लोगों की स्क्रीनिंग मुफ्त है और हमें बीएमसी से कोई मुआवजा भी नहीं मिलता है। इस परीक्षण के दौरान जिन लोगों के संक्रमित होने का संदेह है या कोविड-१९ होने का संदेह है, उनके विवरण बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग को दिए गए हैं। धारावी को डॉक्टरों की जरूरत है, तो हमारा भी कर्तव्य है कि हम अपने क्षेत्र और अपने पेशे के साथ न्याय करते हुए कोरोनो वायरस को नियंत्रित करने में मदद करें।यह काम हम दोनों बहनों ने पहले शुरू किया था लेकिन अब, भगवान का शुक्र है कि ४ और महिला डॉक्टर भी इसमें शामिल हो गई हैं।
  दोनों महिला डॉक्टरों ने अपने परिजनों को धन्यवाद दिया और कहा कि यह सब परिवार के लोगों के सहयोग से ही संभव हो पा रहा है। इन दो बहनों कें २-२ बच्चे हैं जिनमें से ्फातिमा का छोटा बच्चा १ वर्ष का और ज़ैनब की ६ महीनें की बच्ची है।

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